Sunday, December 23, 2012

मातृभाषा

जब पहली बार लिखना शुरु किया तो सोचा कि अंगरेज़ी मे लिखती हूँ, भाषा भी सुधर जायेगी और दिल की बात भी हो जायेगी। पर शायद किसी और भाषा में दिल कि बात कह पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। यही कारण है कि आज हिंदी मे लिखना शुरु किया है।

कभी कभी लगता है कि शायद मैं वो आखिरी पीढ़ी हूं जिसके लिये हिंदी मे बातें कहना अंग्रेज़ी से कहीं आसान होगा। असल में तो मेरी पीढ़ी भी नहीं। मेरे चाचा या मामा के बच्चों को ही ले लीजिये। कुछ दिन पहले की बात है, मैने पूछा, white को हिंदी में क्या कहते हैं? उन्हें नहीं पता था।

कभी कभी लगता है कि क्या मैं भी मजबूर होकर अपने माता पिता से कहूंगी कि मेरे बच्चों को परियों कि कहानियां अंग्रेज़ी मे सुनायें? उम्मीद करती हूं, नहीं!

इसी आशा के साथ, कि हिंदी में लिखने के लिये मेरे पास इतने जटिल विचार आते रहेंगे जिन्हें किसी भी और भाषा में व्यक्त कर पाना मुश्किल होगा

शुभ रात्रि!

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